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चीन आक्रामण : नया कानून बना एलएसी पर सेना को दी गयी खुली छूट, भविष्य में सैन्य दखलअन्दाजी की आशंका बढ़ी

कानून के जरिए चीन ने अपनी सेना को सीमा के बेहद निकट सैनिक जमा करने का आदेश दी है, निर्माण करने और एलएसी पर अतिक्रमण जैसे कार्यों को भी औपचारिक स्वीकार्यता दी है।

भारत से हो रहे तनाव के बीच चीन ने शनिवार को नया सीमा-कानून बनाया है,सरकार व सेना को अपने भू-भाग की रक्षा के लिए लड़ने की खुली छूट दी गई है। इस कानून के जरिए चीन ने पिछले वर्ष भारत के साथ हुए सैन्य संघर्षों को कानूनी वैधता भी दी है।

एलएसी व भूटान सीमा के निकट नए ‘सीमांत-गांव’ बसाने की अनुमति भी है। चीन वहां रहने वालों की ‘नागरिक-सेना’ बनाएगा, जिनका इस्तेमाल ‘प्रथम रक्षा पंक्ति’ के रूप में किया जाएगा। यह कानून अगले साल एक जनवरी से लागू होगा।

मार्च में लाए गए इस कानून को कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्ण नियंत्रण वाली विधायिका नेशनल पीपल्स कांग्रेस (एनपीसी) ने शनिवार को प्रेरित किया। जानकारों के अनुसार, यह कानून 14 देशों से लगती हैं चीन की जमीनी सीमा पर नियंत्रण में मदद करेगा। चीन ने इसे ‘सीमा की रक्षा और सीमांत क्षेत्रों को काम में लाने’ के लिए बना कानून बताया। उसने अपनी संप्रभुता और भू-क्षेत्र की अखंडता को भी ‘पवित्र व अटल’ करार दिया है। चुनौती मिलने पर सीमा की रक्षा व युद्ध के लिए सरकार व सेना को कड़ी क़ानूनी कार्रवाही करने का आदेश मिला हैं।

नया कानून पूर्वी व दक्षिण चीन सागर नीति

विशेषज्ञों के अनुसार बताया जा रहा है , चीन का नया कानून पूर्वी व दक्षिण चीन की सागर में लागू उसकी नीति की नकल है, जहां वह लगातार अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करते हुए सामुद्रिक क्षेत्र को अपना बता रहा है। भारत ने एलएसी पर चीन द्वारा चार सीमा-समझौतों के उल्लंघन का मामला उठाया था। यहां उसने 1993 में हुए समझौते के विपरीत शांति बिगाड़ने की कोशिश की थी।

सीमा के निकट भारी संख्या में सैनिक तैनात कर एकतरफा ढंग से गलवान घाटी व पैंगोंग झील, डेमचोक, देपसांग आदि क्षेत्रों में एलएसी में बदलाव की कोशिश की जा रही है। जून 2020 में भारतीय सेना ने उसे कड़ा जवाब दिया जिससे दोनों देशों में 1967 के बाद सबसे हिंसक संघर्ष हुआ। सीमा पर 18 महीने से तनाव जारी है।

सैन्य बातचीत में भारत ने उसे पूर्व स्थिति पर लौटने को कहा है। वहीं भूटान से डोकलाम पठार विवाद के बाद चीन ने यहां अवैध नियंत्रण कर रखा है। निर्माण भी करवा रहा है। वह 628 सीमांत गांव बसाने की नीति के तहत यहां गड़रियों को बसाने की कोशिश में है ताकि उनके जरिए जमीनों पर अपना दावा कर सके।

सैन्य कमांडर एलएसी की सुरक्षा चुनौतियों पर करेंगे मंथन

सेना के शीर्ष अधिकारियों के सोमवार से शुरू हो रहे कमांडर सम्मेलन में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा सहित पूरे देश में सुरक्षा चुनौतियों पर बाते करेंगे। कमांडर सम्मेलन 25 से 28 अक्तूबर तक दिल्ली में चलेगा।

सेना के जानकारों के मुताबित है कि शीर्ष सैन्य अधिकारी पिछले कुछ हफ्तों में जम्मू-कश्मीर में आम नागरिकों की हत्या पर भी इस बैठक के दौरान चर्चा किया जायेगा। उन्होंने बताया कि चार दिवसीय सम्मेलन के दौरान सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे सहित शीर्ष सैन्य अधिकारी पूर्वी लद्दाख में देश की युद्ध तैयारियों का भी जायजा लेंगे, जहां पिछल 17 महीनों से चीन के साथ सीमा विवाद बना हुआ है।

कमांडर सम्मेलन सैन्य अधिकारियों की उच्चस्तरीय 6 महीने के इंतिजार के बाद ये बैठक है, जो हर साल अप्रैल और अक्तूबर में होती है। सम्मेलन के दौरान रक्षामंत्री राजनाथ सिंह सैन्य कमांडरों को संबोधित करेंगे। इसमें सीडीएस, नौसेना और वायुसेना प्रमुख भी भारतीय सेना के शीर्ष नेतृत्व को संबोधित करेंगे।

ताकतवर हुई पीएलए

नए कानून में चीन ने अपनी सेना पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की शक्तियां व दायित्व बढ़ा दी गयी हैं। पीएलए को प्रांतीय सरकारों के साथ मिलकर सीमा से जुड़े काम करने होंगे, जिनमें ड्रिल आयोजन, सीमा पर चुनौती रोकना या लड़ना, अतिक्रमण व निर्माण हटाना, भड़काऊ गतिविधियां टालना शामिल है। पड़ोसी देशों से लंबे समय से चल रहे सीमा विवाद व मामलों को बातचीत के जरिए चीन सरकार व कैबिनेट सुलझाएगी।

सीमांत क्षेत्रों में बढ़ाएगा जा रहा है निर्माण

नए कानून के मुताबिक, सरकार सीमा की सुरक्षा को मजबूत करेगी। वहां आर्थिक गतिविधियां बढ़ाएगी और सामाजिक विकास पर ध्यान देगी। इसके लिए सीमांत क्षेत्रों को खोलने, जनसुविधाएं व बुनियादी निर्माण बढ़ाने तथा स्थानीय नागरिकों की मदद और रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएंगी। सीमा की रक्षा व आर्थिक विकास को जोड़ा जा रहा है।




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