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कोयला संकट से बचने के लिये केंद्र सरकार का बड़ा बयान,राज्यों का कोल इंडिया का 20 हजार करोड़ रुपये बकाया |

देश में कोयला कमी से बिजली कटौती का खतरा मंडरा रहा है। बड़े राज्य में कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल डिफॉल्टर हैं।

दिवाली का त्योहार आ रहा है और ऐसे में भारत में बिजली के समस्या दिनों दिन बढ़ रही है. देश में 135 बिजली घर ऐसे हैं जहां कोयले से बिजली बनाई जाती हैं | 


लेकिन इनमें से आधे के पास तीन दिन से भी कम का कोयला बचा है. भारत की बिजली की लगभग 70% सप्लाई कोयले से ही होती है.

Coal Crisis : देश के कई राज्यों में मौजूद थर्मल पॉवर प्लांट कोयले की कमी का सामना कर रहे हैं. कई प्लांट्स में अब चार दिन की जरूरत का कोयला भी नहीं बचा है. ऐसे प्लांट्स की संख्या बढ़ती जा रही है, जहां कोयले का स्टॉक तेजी से कम हो रहा है. केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह भले ही कह रहे हों कि सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद अभी देश में कोयले की सप्लाई में कोई कटौती नहीं हुई है, लेकिन जानकारों का मानना है कि देश में कम से कम छह महीने तक कोयले का संकट बना रहने की आशंका है. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कोयले का यह संकट क्यों है और सरकार इससे निपटने के लिए क्या कर रही है. इन सभी सवालों के जवाब नीचे सिलसिलेवार दिए जा रहे हैं.

देश के कई थर्मल पॉवर प्लांट्स में औसतन चार दिनों का ही कोयला मौजूद है और ऐसे प्लांट्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है. सरकार के रिकमंडेशन के मुताबिक थर्मल पॉवर प्लांट्स के पास 14 दिनों के लिए कोयले का स्टॉक होना चाहिए. 4 अक्टूबर को 17475 मेगावॉट बिजली उत्पादन क्षमता वाले 16 प्लांटों के पास शून्य दिनों के लिए कोयले का स्टॉक था. इसके अलावा 59790 मेगावॉट बिजली उत्पादन क्षमता वाले 45 अतिरिक्त प्लांटों के पास महज दो दिनों के लिए ही स्टॉक मौजूद था.

हर दिन 165 गीगावॉट की उत्पादन क्षमता वाले प्लांटों की निगरानी की जाती है जिसमें से 132 गीगावॉट की उत्पादन क्षमता वाले प्लांटों में कोयले की उपलब्धता क्रिटिकल लेवल पर है. कोल माइन से दूर मौजूद प्लांट में कोयला उपलब्धता की दिक्कत अधिक है. देश में 288 गीगावॉट की बिजली बनाने के लिए प्लांट स्थापित किए गए हैं जिसमें से 54 फीसदी यानी कि 208.8 गीगावॉट वाले प्लांट कोयले से चलते हैं.

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इस कारण बढ़ा कोयले का संकट

कोरोना महामारी से उबर रही अर्थव्यवस्था में बिजली की मांग बढ़ी. अगस्त 2019 में 10.6 हजार करोड़ यूनिट बिजली की खपत हुई थी जब कोरोना वायरस का प्रकोप नहीं था जबकि इस साल अगस्त 2021 में 12.4 हजार करोड़ यूनिट बिजली की खपत हुई. इस प्रकार आपूर्ति की किल्लत के बीच बढ़ती खपत ने कोयले का संकट बढ़ाया है.

दो साल पहले कोयले से चलने वाले प्लांट से कुल बढ़ी जरूरत की 61.9 फीसदी बिजली सप्लाई हुई थी लेकिन इस साल यह बढ़कर 66.4 फीसदी हो गया.

केंद्रीय ऊर्जा मंत्री के मुताबिक करीब 2.82 करोड़ परिवारों तक बिजली पहली बार पहुंचाई गई है. इस वजह से खपत बढ़ी है.

बिजली की डेली डिमांड में बढ़ोतरी हो रही है. पिछले साल 4 अक्टूबर को देश में 15 गीगावॉट की डिमांड थी जो इस साल बढ़कर पिछले सप्ताह 4 अक्टूबर को 174 गीगावॉट हो गई.

प्लांटों ने अप्रैल-जून 2021 में सामान्य से कम कोयले का स्टॉक रखा. इसके अलावा अगस्त व सितंबर में भारी बारिश के चलते कोयले का उत्पादन कम हुआ और खदानों से प्लांटों तक कोयला भी कम पहुंचा.

आयात कम करने की नीति और वैश्विक बाजार में बढ़ते भाव के चलते कोयले की उपलब्धता प्रभावित हुई.

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सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए किए ये उपाय

थर्मल पॉवर प्लांटों में कोयले के आपूर्ति की निगरानी के लिए कई मंत्रालयों की एक टीम गठित की है. इसमें ऊर्जा व रेलवे मंत्रालय, कोल इंडिया, सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी और पॉवर सिस्टम कॉरपोरेशन के प्रतिनिधि शामिल हैं.

सरकार जिन थर्मल प्लांटों के पास खुद की कोयला खदाने हैं, उन्हें अधिक से अधिक उत्पादन के लिए कह रही हैं ताकि वे कम से कम अपनी मांग को पूरी कर सकें.

ऊर्जा मंत्रालय के निर्देश पर जिन खदानों को जरूरी नियम के अनुसार मंजूरी मिल चुकी है, उनसे उत्पादन शुरू करने वाली है.

खदानों से प्लांटों तक कोयले की आपूर्ति के लिए रेक्स (Rakes) की संख्या बढ़ाया गया है यानी अधिक कोयले की आपूर्ति की जा रही है.

सरकार के इन उपायों के बावजूद फिलहाल कोयले की कमी और उसके कारण बिजली का संकट खड़ा होने की आशंका ने देश को चिंता में डाल दिया है. कई राज्य सरकारों ने केंद्र से इस का जल्द समाधान निकालने की अपील की है. अगर इन आशंकाओं को दूर नहीं किया गया तो आम लोगों को बिजली कटौती के कारण होने वाली परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.पिछले साल की भारी आर्थिक मंदी के बाद भी पटरी पर लौटने की कोशिश कर रही हैं, इकॉनमी की रिकवरी पर भी इसका बुरा असर पड़ने की आशंका को इनकार नहीं किया जा सकता.

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