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मौसम विभाग की जानकारी: बारिश को सितम्बर तक लौट जाना था, अक्तूबर में उत्तराखंड से केरल तक बारी बारिश का कहर रहा

दिल्ली ने 1901 यानी 120 साल बाद चौथी बार अक्तूबर महीने में 87.9 एमएम बारिश दिखाई दिया गया है। यह 1956 के बाद सबसे बड़ा आंकड़ा है। इसी तरह ओडिशा के बालासोर में 210 एमएम बारिश हुए हैं, बीते 10 साल में दूसरी बार है।

यूपी, उत्तराखंड से लेकर केरल और तमिलनाडु तक इस समय बारिश का कहर बना हुआ है। फसलें तबाह हो रही हैं, बड़ी संख्या में नागरिकों को चिंतीत का विषय है किसान फसले ख़राब  होने के वजय से अपनी जान दे रहे है। अक्तूबर से दिसंबर तक तीन महीनों में केरल में उत्तर-पूर्वी मानसून से जितनी बारिश होती है, उसकी 84% 18 अक्तूबर तक हो चुकी है। मौसम विभाग और विशेषज्ञ इसके पीछे के कारण बता हैं,

3 कारण है हुई बारिश : दक्षिण-पश्चिम मानसून की देर से होना : जून से होने वाली बारिश देश की दक्षिण में शुरू होने वाला दक्षिण पश्चिमी मानसून चार महीने में यानी सितंबर तक विदा हो जाता है। इस बार यह अक्तूबर के दूसरे हफ्ते से विदा हुआ।

उत्तर-पूर्वी मानसून बननी हुए है : दक्षिण-पश्चिम मानसून खत्म होने के साथ ही दक्षिण राज्यों में अक्तूबर से उत्तर-पूर्वी मानसून बना होता है। देर तक जमे दक्षिण-पश्चिम मानसून के साथ इसने भी असर दिखना चालू हो गया है ।

पश्चिमी विभाग में कम दबाव वाले क्षेत्रों का असर डाला :दो मानसून के बीच पश्चिमी उफान ने दिल्ली-एनसीआर, लद्दाख, कश्मीर, यूपी व उत्तराखंड में बारिश हुआ है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में भी एक साथ कम दबाव के क्षेत्र बने। इनसे केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, दिल्ली, मध्यप्रदेश उत्तराखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, राजस्थान आदि में 15 से 19 अक्तूबर तक बारिश हुए है ।

बारिश ने रिकॉर्ड बनाया :दिल्ली ने 1901 यानी 120 साल बाद चौथी बार अक्तूबर महीने में 87.9 एमएम बारिश देखी। यह 1956 के बाद सबसे ज्यादा आंकड़ा देखने को मिला है। इसी तरह ओडिशा के बालासोर में 210 एमएम बारिश होना, बीते 10 साल में दूसरा मौका है। केरल के एर्नाकुलम, कोल्लम, इडुक्की, कोट्टयम आदि जिलों में एक ही दिन में 200 एमएम तक बारिश हुआ है | 





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