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दूध-पनीर: अगर दूध और पनीर खाने से होती है दिक्कत, तो इस बीमारी के हो सकते हैं लक्षण। जाने क्या है इलाज...

पेट की समस्याओं में से कुछ ऐसी भी हैं जो बहुत गम्भीर रूप नहीं लेतीं और जिनका इलाज भी आसान होता है। लैक्टोज़ इन्टॉलरेंस (Lactose Intolerance) भी ऐसी ही एक समस्या है। इनके साथ भी सामान्य जीवन जिया जा सकता है, बस थोड़े से परिवर्तनों के साथ।



प्रिया पांडेय
डायटिशियन (आहार विशेषज्ञ), उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- बी.एस.सी. (मानव पोषण)
अनुभव- 8 वर्ष

आपने कई लोगों को यह कहते सुना होगा कि उन्हें दूध, पनीर आदि हजम नहीं होता। यहां तक कि कई नवजात शिशुओं को भी जन्म के बाद फॉर्मूला दूध देते समय डॉक्टर इस बात की सुनिश्चित करते हैं कि बच्चा लैक्टोज इन्टॉलरेंट तो नहीं है। इसी हिसाब से फॉर्मूला प्रेस्क्राइब किया जाता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसका पता बहुत ही सामान्य तरीकों से चल सकता है और इसका इलाज भी कठिन नहीं होता। मुश्किल तब होती है जब इस पर नियंत्रण नहीं रह पाता और इसके लक्षण तकलीफ देने लगते हैं। 


क्या है लैक्टोज इंटॉलरेंस (Lactose Intolerance)...
लैक्टोज इन्टॉलरेंस की समस्या भी असल में शकर से जुड़ी हुई है। लैक्टोज (Lactose) का मतलब ही होता है डेयरी पदार्थों या दूध आदि में मौजूद शकर। लेक्टोज इनटोलरेंस (Lactose Intolerance) से ग्रसित व्यक्ति इन पदार्थों में मौजूद शकर को पूरी तरह पचा (Digest) नहीं पाता इसके परिणाम स्वरूप डायरिया (Dayariya) यानी कि दस्त, गैस (Gas) तथा ब्लाटिंग जैसे लक्षण उभरने लगते हैं। इस स्थिति के लिए छोटी आंत में उत्पन्न होने वाले एक एंजाइम (लैक्टेस) की मात्रा जिम्मेदार होती है। यदि यह एंजाइम बहुत कम मात्रा में उत्पन्न होता है तो लेक्टोस इनटोलरेंस की समस्या होती है।कुछ मामलों में यह भी होता है कि एंजाइम की मात्रा थोड़ी कम होने पर इंसान दूध या दूध से बने पदार्थों को पचा लेता है लेकिन यदि एंजाइम बहुत ही कम मात्रा में हो तो पाचन में मुश्किल आती है।


आमतौर पर दूध या दूध से बने पदार्थों से सेवन के आधे घण्टे से 2 घण्टे के बाद लक्षण सामने आते हैं। इनमें डायरिया के अलावा उल्टी या नॉशिया, पेट में दर्द या मरोड़ होना, घबराहट होना या गैस बनना शामिल है। चूंकि दूध या डेयरी उत्पाद शारीरिक विकास के लिए भी जरूरी होते हैं साथ ही इनसे पोषण भी मिलता है इसलिए इनका सेवन जरूरी भी है। ऐसे में लैक्टोज इनटॉलेरेंस (Lactose Intolerance) व्यक्ति के लिए जरूरी हो जाता है कि वह इसके विकल्प ढूंढे। खासकर बच्चों के मामले में क्योंकि उन्हें बचपन से ही यदि सही पोषण न मिले तो आगे जाकर दिक्कत हो सकती है। 


समस्या के कई रूप...
लेक्टोज इनटोलरेंस (Lactose Intolerance) दो तरह का हो सकता है -
  • पहला है प्राइमरी लेक्टोज इनटोलरेंस जिसमें बचपन से धीरे-धीरे वयस्क होने तक एंजाइम का उत्पादन कम होता है।
  • दूसरा है सेकेंडरी लेक्टोज इनटोलरेंस जिसमें किसी बीमारी, चोट या आंत से जुड़ी सर्जरी की वजह से यह समस्या सामने आती है। 
इन बीमारियों में आंत से जुड़ा कोई संक्रमण, सैलियक डिसीज, बैक्टीरिया संबंधी कोई तकलीफ या फिर क्रोन्स डिजीज आदि शामिल है। दुर्लभ मामलों में कई बार यह समस्या जन्मगत भी हो सकती है।

जांच के बाद अपनाएं सही डाइट...
कुछ सामान्य जांच और शारीरिक परीक्षण के बाद डॉक्टर आपको यह स्पष्ट कर सकते हैं कि आप लेक्टोज इनटोलरेंस से पीड़ित हैं। डॉक्टर आपको डाइट से जुड़ी सावधानियों के बारे में बता सकते हैं। आमतौर पर दूध या दूध से बने पदार्थों के सेवन पर रोक लगाने से आराम मिल जाता है। हालांकि कुछ मामलों में ऐसा भी होता है कि थोड़ी मात्रा में उक्त पदार्थ का सेवन भी दिक्कत नहीं देता। लेकिन अगर तकलीफ ज्यादा है तो इनसे दूरी बनाना बेहतर होता है।

आजकल बाजार में लेक्टोज फ्री उत्पाद भी आसानी से मिल जाते हैं जिनका प्रयोग किया जा सकता है। डॉक्टर आपको कुछ सामान्य दवाइयां भी दे सकते हैं जिनसे लक्षणों पर नियंत्रण पाने में मदद मिलती है। लेकिन सबसे ज्यादा जरूरी यह है कि आप अपनी डाइट को इस तरह से प्लान करें कि उससे आपको सभी पोषक पदार्थों की पूर्ति हो सके। क्योंकि दूध या दूध से बने पदार्थ आप नहीं खा सकते ऐसे में आपको कैल्शियम, विटामिन डी, राइबोफ्लेविन और प्रोटीन जैसे पदार्थों की कमी हो सकती है। इसलिए आवश्यक है कि आप डाइट में उन चीजों को शामिल करें जो इन पोषक तत्वों की पूर्ति कर सकें।

इन चीजों का करें सेवन...
लेक्टोज इनटोलरेंस (Lactose Intolerance) होने का मतलब यह नहीं है कि आप पोषक तत्व नहीं खा सकते। डेयरी उत्पादों के अलावा भी अन्य साधनों से अपने लिए पोषक तत्वों की पूर्ति कर सकते हैं। अपनी डाइट में दही को जरूर शामिल करें।
दही पेट के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है और यह लेक्टोज इनटोलरेंस लोगों के लिए भी अच्छा होता है। इसके अलावा हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मैथी व ब्रोकली आदि, ताजे फल जैसे संतरे, सोया मिल्क, बादाम, टोफू व मांसाहारी हैं तो कुछ विशेष प्रकार की मछलियों आदि का प्रयोग कर सकते हैं। इनसे आपको भरपूर मात्रा में कैल्शियम तथा विटामिन और खनिजों सभी की पूर्ति हो जाएगी। विटामिन-D के लिए सबसे अच्छा स्रोत है धूप इसका भी भरपूर सेवन करें।


ये न खाएं...
लेक्टोज इनटोलरेंस (Lactose Intolerance) लोगों को केवल दूध व डेयरी प्रोडक्ट से ही तकलीफ नहीं होती। कई ऐसे डिब्बाबंद पदार्थ होते हैं जिनमें डेयरी प्रोटीन या लेक्टोज (Lactose)हो सकते हैं। इसलिए यदि आप किसी डब्बाबंद पदार्थ का प्रयोग करते हैं जैसे कि कोई कॉफी पाउडर, पैनकेक, बिस्किट या केक मिक्स, बेक किए हुए खाद्य, ब्रेड, प्रोसेस्ड सीरियल, सूप या क्रीमी सॉस आदि, तो खरीदने से पहले इंग्रेडिएंट्स को जरूर चेक करें। 


डॉक्टर से जरूर लें सलाह...
यदि आप अपनी डाइट से सभी पोषक तत्वों की पूर्ति नहीं कर पा रहे हैं तो डॉक्टर से सलाह लेकर सप्लीमेंट भी ले। याद रखिए कि सप्लीमेंट डॉक्टर के कहे अनुसार उसी मात्रा में और उतने ही दिनों के लिए लेना है। अपने मन से कोई भी दवा या सप्लीमेंट न लें। यह भी याद रखें कि केवल दूध या दूध से बने पदार्थ ही आप को नुकसान नहीं पहुंचा सकते। कई बार कुछ विशेष दवाइयां जैसे कि बर्थ कंट्रोल पिल्स या विटामिन की गोलियां भी लेक्टोज इनटॉलरेंस की स्थिति को पैदा कर सकती है। इसलिए आप जो भी दवाइयां ले रहे हो उन्हें लेकर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।


नोट: यह लेख अनुभवी डायटिशियन (आहार विशेषज्ञ) प्रिया पांडेय के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। उन्होंने कानपुर के सी.एस.जे.एम. विश्वविद्यालय से मानव पोषण में बी.एस.सी. किया है। उन्होंने कानपुर के आभा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में आहार विशेषज्ञ के रूप में काम किया है। उन्होंने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में पोषण व्याख्यान के विषय के प्रतिनिधि के रूप में भी भाग लिया है। उनका इस क्षेत्र में 8 वर्ष का लंबा अनुभव है। 


News Credit - अमर उजाला

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