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Gadkari reaching Parliament by hydrogen powered vehicle: क्यों अहम है मंत्री का यह कदम

 Gadkari reaching Parliament by hydrogen powered vehicle: क्यों अहम है मंत्री का यह कदम


गडकरी जिस इलेक्ट्रिक कार में बैठकर संसद पहुंचे, उससे सिर्फ ग्रीन एनर्जी के इस्तेमाल का संदेश ही नहीं दिया गया, बल्कि अगर वृहद परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो उनका यह कदम भारत सरकार के ग्रीन एनर्जी के विकल्पों पर बदलते रुख को भी दिखाता है। 




केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी बुधवार को हाइड्रोजन को ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने वाले वाहन में बैठकर संसद पहुंचे। उनके इस कदम की पूरे देश में चर्चा हो रही है। फिलहाल देशभर में लोग उनकी कार को लेकर पूरी जानकारी हासिल करने में जुटे हैं। हालांकि, गडकरी ने इस कार के इस्तेमाल से सिर्फ ग्रीन एनर्जी के इस्तेमाल का संदेश ही नहीं दिया है, बल्कि अगर वृहद परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो उनका यह कदम भारत सरकार के ग्रीन एनर्जी के विकल्पों पर बदलते रुख को भी दिखाता है। 


पहले जानें- नितिन गडकरी किस गाड़ी में पहुंचे संसद?


केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री जापानी कंपनी टोयोटा के मिराई वाहन में बैठकर संसद पहुंचे। इसमें तीन हाइड्रोजन टैंक्स हैं, जो कि किसी आम पेट्रोल वाहन की तरह महज पांच मिनट में ही रिफिल हो जाते हैं। वाहन को संचालित करने के लिए जीवाश्म ईंधन (पेट्रोल-डीजल) से चलने वाली मोटर की जगह 1.24 kWh लिथियम आयन बैटरी पैक है। कार को ताकतवर बनाने के लिए 182 हॉर्सपावर की इलेक्ट्रिक मोटर है।


गडकरी के हाइड्रोजन चालित वाहन में बैठकर आने के क्या हैं मायने?


हाइड्रोजन चालित वाहन में बैठकर संसद पहुंचने के बाद गडकरी के दफ्तर की तरफ से माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट कू पर पोस्ट में कहा गया- "केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी आज हाइड्रोजन आधारित फ्यूल सेल से चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहन (एफसीईवी) में बैठकर संसद भवन पहुंचे। ग्रीन हाइड्रोजन से चलने वाली कार का प्रदर्शन कर गडकरी जी ने हाइड्रोजन और एफसीईवी तकनीक और इसके फायदों को लेकर जागरूकता फैलाने का काम किया, ताकि भारत में भी हाइड्रोजन आधारित समाज को बढ़ावा दिया जा सके।"

बैटरी पावर्ड व्हीकल या हाइड्रोजन चालित कारें, जानें कौन बेहतर?


सरकार के रुख में बदलाव की एक बड़ी वजह यह है कि जहां हाइड्रोजन से चलने वाली एफसीईवी सीधा ग्रीन फ्यूल से चलती हैं तो वहीं बैटरी से चलने वाली बीईवी चार्जिंग की बदौलत काम करती हैं। अब जहां एक एफसीईवी को ईंधन भरवाने में सिर्फ कुछ मिनटों का ही समय लगता है, तो वहीं बैटरी वाले वाहन को चार्जिंग में ही कम से कम 30 से 45 मिनट तक लग जाते हैं। 

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