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Operation Shakti: पोखरण में किए थे पांच परमाणु परीक्षण

Operation Shakti: पोखरण में किए थे पांच परमाणु परीक्षण

11 मई व 13 मई 1998 को राजग नीत अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में खेतोलाई गांव पांच परमाणु परीक्षण किए थे।




आज से 24 साल पहले तत्कालीन अटल सरकार ने राजस्थान के पोखरण में लगातार परमाणु धमाके कर पूरी दुनिया को चौंका दिया था। ऑपरेशन शक्ति' (Operation Shakti) के तहत किए इन परीक्षणों के जरिए भारत ने अटल इरादों का परिचय देकर सशक्त भारत को और बुलंदी दी थी। 


11 मई व 13 मई 1998 को राजग नीत अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में खेतोलाई गांव पांच परमाणु परीक्षण किए थे।

अमेरिका भी खा गया था गच्चा, विरोध में लगाई थी पाबंदियां


अटल सरकार ने पोखरण-2 परीक्षण की समूची व्यूह रचना इतनी गुप्त रखी कि अमेरिका व उसके उपग्रह तक गच्चा खा गए थे। किसी को कानों-कान खबर नहीं लगी कि भारत इतना बड़ा कदम उठा रहा है। हालांकि विरोध स्वरूप अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों ने भारत पर सख्त पाबंदियां लगाई थी। सिर्फ इस्राइल ने भारत का साथ दिया था। 


अटलजी खुद गए थे पोखरण


सफल परमाणु परीक्षण के बाद तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था 'आज भारत ने पोखरण में भूमिगत परीक्षण किया।' अटलजी तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीस के साथ खुद परीक्षण स्थल पर गए थे। इस परीक्षण से भारत का सीना चौड़ा हो गया और वह घोषित रूप से परमाणु शक्ति संपन्न देश बन गया था। तब अटलजी ने नारा दिया था- 'जय जवान, जय किसान और जय विज्ञान।' इसके बाद से 11 मई का दिन हर साल 'नेशनल टेक्नोलॉजी डे' के रूप में मनाया जाता है।

1974 में हुआ था पहला परीक्षण, भाभा ने जगाया था अलख


भारत विश्व में परमाणु क्रांति का अगुआ रहा है। डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने काफी पहले इसका अलख जगाया था, लेकिन उनके सपनों को षड्यंत्रों ने चूर कर दिया था। इसके बाद शक्ति स्वरूपा तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 18 मई 1974 को पोखरण में पहला परमाणु परीक्षण कराकर विश्व के परमाणु क्षमता संपन्न देशों की सूची में भारत का नाम दर्ज करा दिया था। पोखरण-1 का नाम 'बुद्ध स्माइलिंग' (बुद्ध मुस्करा रहे हैं)। रखा गया था। इसके बाद 1995 में भारत ने और परीक्षण की कोशिश की, लेकिन विश्व समुदाय के कड़े तेवर से ये नहीं हो सके थे। 

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने निभाई अहम भूमिका


1998 के परमाणु परीक्षण में तत्कालीन रक्षा वैज्ञानिक, मिसाइलमैन और 2002 में राष्ट्रपति बनाए गए डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने अहम भूमिका निभाई थी।


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