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Secrets of Taj Mahal: 29 साल पहले हुआ था तहखाने का सर्वे

Secrets of Taj Mahal: 29 साल पहले हुआ था तहखाने का सर्वे

ताजमहल के तहखाने में बने 20 कमरों को खोलने की याचिका पर हाईकोर्ट में बृहस्पतिवार को सुनवाई होनी है, लेकिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और देश के नामी गिरामी संस्थानों के लिए तहखाना कई बार खुला है। ताजमहल की मजबूती परखने के लिए समय-समय पर तहखाने में जाकर इसका सर्वे किया गया है। 




एएसआई ने 16 साल पहले तहखाने का संरक्षण कराया था, लेकिन इसकी मजबूती परखने के लिए नेशनल जियोग्राफिक रिसर्च इंस्टीट्यूट और रुड़की विश्वविद्यालय ने वर्ष 1993 में सर्वे कराया था, जिसमें ताजमहल के तहखाने की दीवार तीन मीटर मोटी बताई गई और मुख्य गुंबद पर असली कब्रों के नीचे का हिस्सा ठोस बताया गया। रुड़की विश्वविद्यालय ने इस सर्वे में इलेक्ट्रिकल, मैग्नेटिक प्रोफाइलिंग तकनीक, शीयर वेब स्टडी और ग्रेविटी एंड जियो रडार तकनीक का उपयोग किया था। 

ताजमहल पर भूकंप के प्रभाव के लिए रुड़की विश्वविद्यालय के अर्थक्वेक इंजीनियरिंग विभाग ने 1993 में सर्वे कराया। प्रोजेक्ट नंबर पी-553 ए की रिपोर्ट जुलाई 1993 में जारी की गई। भविष्य के भूकंप की स्थिति में ताजमहल को नुकसान होने की स्थिति के लिए यह सर्वे किया गया था। इसके लिए ताजमहल के तहखानों को खोला गया था, जिसमें गुंबद, मीनारों, तहखानों की दीवारों की मजबूती को जांचा गया।

13 मीटर गहरी हैं ताज और महताब बाग की नींव

नेशनल जियोग्राफिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट ने महताब बाग और ताजमहल का एक साथ सर्वे किया, जिसमें मेग्नेटिक प्रोफाइलिंग तकनीक के इस्तेमाल से पता चला कि ताजमहल और महताब बाग के जो हिस्से जानकारी में है, उनके अलावा नींव में कोई स्ट्रक्चर नहीं पाया गया। फाउंडेशन के कुंओं पर बोर होल ड्रिल 9.50 मीटर गहराई तक किए गए। रिफ्लेक्शन सीस्मिक जांच में ताजमहल की नींव में 90 मीटर तक सख्त चट्टानें पाई गईं।

ताजमहल और महताब बाग की नींव की गहराई नदी किनारे 13 मीटर तक पाई गई। चमेली फर्श के नीचे के कमरों पर नदी किनारे की ओर तीन मीटर तक चौड़ी दीवारें मिलीं। सर्वे में बताया गया कि मुख्य गुंबद में असली कब्रों के नीचे का हिस्सा खाली नहीं है। शीयर वेव स्टडी में यह ठोस होने की जानकारी देता है।

केवल स्टडी के लिए खोले जाएं तहखाने : केके मुहम्मद

पदमश्री से सम्मानित और आगरा सर्किल के अधीक्षण पुरातत्वविद रहे केके मुहम्मद ने अमर उजाला से अपने अनुभव साझा किए। केरल में रह रहे केके मुहम्मद ने कहा कि ताजमहल के तहखाने हमेशा से खुले हैं, केवल पर्यटकों के लिए ये बंद हैं। एएसआई उनकी देखभाल और संरक्षण अच्छे ढंग से कर रहा है। ताजमहल विश्व धरोहर है। 

कोई भी विवाद इसे नुकसान पहुंचाएगा। वह कई बार तहखाने में संरक्षण कार्यों के लिए गए हैं, पर उन्होंने कोई धार्मिक प्रतीक चिह्न नहीं देखा। रामबाग और एत्माद्दौला जैसे यमुना नदी किनारे बने स्मारकों में ठीक ऐसे ही तहखाने बने हैं, जिनके ऊपर स्मारक बने हुए हैं। धार्मिक रंग देने की जगह तहखाने को केवल स्टडी के लिए खोला जाए। विशेष अनुमति लेकर रिसर्च स्कॉलर को जाने दिया जाए।


कोर्ट की निगरानी में खोलकर वीडियोग्राफी की जाए : प्रो. नदीम रिजवी

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग के प्रोफेसर नदीम रिजवी ने ताजमहल को धार्मिक रंग दिए जाने पर नाराजगी जताई और कहा कि 300 साल तक ताजमहल के तहखाने और बाकी हिस्से खुले रहे। कई पीढ़ियों ने इसे देख लिया। कोई चिह्न यहां नहीं है। ताज के जो हिस्से बंद किए, वह धार्मिक कारणों से नहीं किये गए, बल्कि ताज में भीड़ और सुरक्षा कारणों से किए गए। 

स्मारक की संरक्षा और पर्यटकों की सुरक्षा के लिए एएसआई ने पूरे देश में स्मारकों के कुछ हिस्सों को बंद किया। प्रो. रिजवी ने कहा कि ताज के तहखाने खोलने में कोई हर्ज नहीं है, लेकिन यह कोर्ट की निगरानी में खोले जाएं और वीडियोग्राफी की जाए। तहखाने खोलने के बाद यह डर है कि कहीं कोई मूर्ति न रख दे और विवाद स्थायी हो जाए।

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सुगम आनंद ने कहा कि ताजमहल के तहखानों के सर्वे में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। एक बार वीडियोग्राफी करा ली जाए तो विवाद समाप्त हो जाएंगे। पर्यटकों के लिए तहखाने खोलना आर्कियोलोजी के मुताबिक मुमकिन नहीं है।

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